शीर्षक --- ऋतुराज का आगमन
लेखक --- हर्षवर्धन शर्मा ( जयपुर राजस्थान )
आया बसंत, आया बसंत,
लेकर खुशियाँ अनंत।
धरती ने ओढ़ी पीली चुनरिया,
महक उठी है डगर-डगरिया।
सरसों के खेत लहलहाए,
आमों पर बौरे मुस्काए।
कोयल की कुहू-कुहू गूंजे,
भँवरे फूलों का मुख चूमे।
विद्या की देवी का वंदन
वीणा वादिनी, माँ सरस्वती,
श्वेत वस्त्रों में सोहे मूरति।
कमल आसन पर तुम विराजी,
ज्ञान की ज्योत जगा दो ताजी।
अज्ञान का अंधेरा दूर करो,
बुद्धि और विद्या से मन को भरो।
हाथ जोड़ हम करें प्रणाम,
सफल करो माँ सब के काम।
पतंगों से सजा नीला आकाश,
चारों ओर छाया नया प्रकाश।
मंगलमय हो यह पावन त्यौहार,
बसंत लाया खुशियों की फुहार।